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खुदरा एंव अन्य समुदाय के व्यापारियों समेत उत्तराखंड राज्य के दुर्गम व सुगम क्षेत्रों के बाशिन्दों को करना पड़ रहा मुश्किलों का सामना

उत्तराखंड राज्य के कुछ महानगर तथा महत्वपूर्ण जनपदों का सफ़र किया है, जिसके जरिए हम प्रवासी मजदूर एवं यहां के प्रवासी व्यापारियों की और यहां के बाशिन्दों की समस्या रिपोर्ट के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं,उत्तराखंड की स्थिति मैदानी इलाकों से बिल्कुल भिन्न है. उत्तराखंड के कुछ जिलों में से अधिकतर पहाड़ी जिले हैं जहां लोगों को बहुतायत मात्रा में समस्या का सामना करना पड़ रहा है और यहां के पहाड़ी इलाकों में सब्जी, फल, मटन चिकन या अन्य व्यापार के व्यापारियों की  और यहां के बाशिन्दों की समस्या लॉक डाउन की वजह से  पहले से अधिक बढ़ गई है

 

ट्रांसपोर्ट की मदद से रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाया जाता है। अचानक लॉकडाउन से ट्रांसपोर्ट से होने वाली सप्लाई ब्रेक हो गयी। इससे पहाड़ी जीवन मैदानी इलाकों की अपेक्षा अधिक कठिन हो गया। लोग बताते हैं कि धीरे-धीरे स्थिति पटरी पर आ रही है। बाज़ारों में जरूरत का समान पहुंचने लगा है। लेकिन लॉकडाउन से गरीब, किसान और प्रवासी मजदूर की समस्याएं और गहराती चली जा रही हैं। ‌ जनपद पौढ़ी, गढ़वाल का एक छोटा सा कस्बा सतपुली‌ है, हमने जब बात की सतपुली बाजार के सब्जी, फल के व्यापारी बदला हुआ नाम (समसुल खान) से तो वह बताते हैं कि लॉक डाउन की वजह से उनको दुगना नुकसान तो हो ही रहा था, लेकिन अचानक कुछ अराजक तत्व द्वारा जमात के मुद्दे को बढ़ा चढ़ा कर पेश किया गया  जिससे लोगों में ऐसे भ्रांति पैदा कर दी गई की अगर हम मुस्लिम व्यापारियों  के यहां से कुछ भी खरीदेंगे तो हमें भी कोरोनावायरस हो सकता है। जबकि यह सरासर झूठ और अफवाह है। बदला हुआ नाम कहते हैं कि हमें व्यापार में कम से कम 40 फीसदी घाटे का सौदा करना पड़ रहा है,और बताते हैं कि जो उनके परमानेंट ग्राहक थे वह भी सब्जी एवं फल उनके पास से नहीं खरीद रहे हैं। और समसुल बताते हैं कि अगर कोई अन्य व्यापारी वही सब्जी ₹20 में दे रहा है और समसुल ₹15 में दे रहे हैं तब भी अधिकतर लोग लेने को तैयार नहीं हैं।

 

समसुल कहते हैं कि जमात का मामला तो कुछ समस्या बढ़ाया ही है ,लेकिन सोशल मीडिया या अन्य मीडिया द्वारा एवं अन्य लोगों द्वारा इसका बढ़ा चढ़ाकर फैलाव किया जा रहा है, इस नुकसान का हम छोटे व्यापारियों को सामना करना पड़ रहा है व्यापारी का कहना है कि यह बर्ताव केवल 30 फ़ीसदी लोग ही कर रहे हैं बाकी के 70 फ़ीसदी लोगों का व्यवहार पहले के ही जैसा सामान्य है…

जो यहां अपनी जीविका चलाने के लिए मजदूरी का कार्य करते हैं लेकिन इस समय लॉक डाउन की वजह से उनके पास कोई कार्य नहीं है,और अभी वह पैसे की कमी से परेशान एवं विवश है, इनके पास खाने की भी समस्या थी लेकिन यहां पर भी कुछ स्थानीय लोगों ने आर्थिक मदद एवं राशन वितरण का कार्य कर इनकी यह समस्या को कम करने का प्रयास किया है

रुद्रपुर भारत के उत्तराखण्ड राज्य में उधम सिंह नगर जनपद का एक नगर है। जनसंख्या के आधार पर यह कुमाऊँ का दूसरा, जबकि उत्तराखण्ड का पांचवां सबसे बड़ा नगर है।

 

ज़ाहिद रिज़वी उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष  हैं,और वर्तमान में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य हैं। हमने इनसे बात की और हमने प्रश्न किया कि-आपको क्या लग रहा है कोरोना वायरस के बाद से जो प्रकरण तबलीगी जमात का हुआ है, दिल्ली के निजामुद्दीन से होता हुआ और फिर आर्थिक बहिष्कार तक पहुंचा है इस पूरे प्रकरण को आप किस तरह देखते हैं.?

ज़ाहिद रिज़वी अपनी में बात कहते हैं कि कोरोनावायरस से पूरा देश परेशान है और विश्व भर में जितने भी सुपर पावर देश हैं उनकी भी स्थिति बेहद खराब है और वह भी जूझ रहे हैं।

ज़ाहिद  रज़ा रिजवी का कहना है कि कोरोनावायरस कई देशों के बाद हिंदुस्तान में आया और हमें पूर्ण आशा है कि हिंदुस्तान से सबसे पहले जाएगा भी।

ज़ाहिद जी हुकूमत के इस फैसले को सराहते हुए कहते हैं, कि लॉकडाउन का फैसला एक मात्र ही ऐसा उपाय है कि इससे कोरोना को रोका जा सकता है,लेकिन कुछ चीजें रह गई जैसे मजदूर वर्ग,फुटपाथ पर रहने वाले झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले क्योंकि उधम सिंह नगर में करीब 300 से अधिक फैक्ट्रियां हैं जहां पर मजदूरी के चक्कर में कई अन्य प्रदेशों से मजदूर आते हैं और यहां मजदूरी कर अपना गुजर-बसर करते हैं।

 

फिर ज़ाहिद रजा रिज़वी ने अपनी बात तबलीगी जमात पर रखते हुए कहा मुस्लिम में दो 2 वर्ग हैं देवबंदी और बरेलवी,और कहते हैं कि तबलीगी जमात देवबंदी सेक्टर से ताल्लुक रखता है लेकिन जो यहां उत्तराखंड के कुछ इलाकों में जैसे कुमाऊं रामनगर हल्द्वानी नैनीताल में जो मुस्लिम रहते हैं वह बरेलवी समुदाय से आते हैं , तो यहां पर जमात का मामला  ही नहीं होना चाहिए।

लेकिन जहां तक जमात का मामला है, तो  दिल्ली के निजामुद्दीन में लोग फंसे थे यह सत्य है,लेकिन उन्होंने यह गलती की और वास्तविकता को छुपाया, जिस कारण इससे लोगों को मुद्दा मिल गया,और इसे पॉलिटिकल इशू बना दिया गया उनको वास्तविकता नहीं छुपाना चाहिए था। मौलाना मोहम्मद ज़ाहिद रजा रिजवी ने एक महत्वपूर्ण बात कहा कि अगर जमात से कोरोना वायरस फैल रहा है,

तो जिस देश में तबलीगी जमात नहीं हुई वहां करोना कैसे आ गया बहुत से ऐसे देश हैं-ऑस्ट्रेलिया,इटली,अमेरिका में जहां मुसलमान ना के बराबर हैं,वहां कोरोना कैसे आ गया.? और कैसे फैल गया.?

यह केवल एक पॉलिटिकल इशू है जिसे स्टैंड बना लिया गया है,इससे केवल सांप्रदायिकता का वायरस पूरे देश में फैलाया जा रहा है जो कि बेहद खतरनाक है और मौलाना ज़ाहिद रजा रिजवी कहते हैं,कि कोरोना की कोई जात नहीं है,कोई धर्म नहीं है,इसलिए इसे बिना समुदाय,वर्ग,धर्म,जाति से जोड़ते हुए इसे खत्म करने के लिए हमें बड़ी लड़ाई मानवता,समाज,देश,इंसानियत के हिफाजत के लिए सबको साथ लड़ना होगा। फिर अंत में उन्होंने वहां के प्रवासी मजदूरों के बारे में बताया कि सरकार द्वारा और समाजसेवी लोगों द्वारा उन मजदूरों तक लगातार हर संभव मदद करने का प्रयास किया जा रहा है।

 

उत्तराखंड के पौड़ी से ऋषभ उपाध्याय की रिपोर्ट फस्ट न्यूज 24×7

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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