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भारत के लिए वरदान बना यह टीका, नहीं तो कोरोना मचा देता कोहराम, जानिए कैसे…

Mithlesh kumar: दुनिया में कोरोना वायरस ने जिस तरह से कोहराम मचाया हुआ है, उसे देखकर कहा जाता है कि यह बीमारी लंबे समय तक परेशान करेगी। चीन के बाद दुनिया में जनसंख्‍या के हिसाब से भारत का नंबर आता है, हालांकि कोरोना का संक्रमण देश में इतना ज्‍यादा नहीं है, जितना यूरोप और पश्चिमी देशों में है।

दयाकृष्‍ण, नई दिल्‍ली: दुनिया में कोरोना वायरस ने जिस तरह से कोहराम मचाया हुआ है, उसे देखकर कहा जाता है कि यह बीमारी लंबे समय तक परेशान करेगी। चीन के बाद दुनिया में जनसंख्‍या के हिसाब से भारत का नंबर आता है, हालांकि कोरोना का संक्रमण देश में इतना ज्‍यादा नहीं है, जितना यूरोप और पश्चिमी देशों में है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन सबसे दुनियाभर के वैज्ञानिकों का मानना है कि भारत में बच्‍चों को लगने वाला बीसीजी का टीका इसकी सबसे बड़ी वजह है।

हाल ही में आई एक रिचर्स भी इस बात को साबित करती है कि अमेरिका अमेरिका, इटली, नीदरलैंड्स, बेल्जियम और लेबनान में यह टीका कभी नहीं लगाया गया। जिसके कारण वहां के लोग कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। इन देशों में उन देशों की तुलना में चार गुना ज्यादा मामले सामने आएंगे, जहां बीसीजी का टीका लगाया जाता है। जबकि भारत में आजादी के बाद से ही बीसीजी का टीका लगता आ रहा है। साल 1978 में इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया गया और यह अबतक जारी है।

बीसीजी का टीबी की बीमारी के अलावा दूसरे कई वायरस से लड़ने का काम करता है। भारत, ब्राजील, जापान में यह टीका 7 दशक से भी ज्‍यादा समय से लगाया जाता है, जबकि ईरान में इसकी शरुरुआत 1984 में हुई। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि ईरान में 1984 से पहले पैदा हुए लोगों को बीसीजी का टीका नहीं दिया गया। जिस कारण यहां पर परिणाम दूसरे हो सकते हैं। हालांकि डॉक्‍टरों ने यह भी साफ किया है कि यह टीका कोरोना वायरस को नहीं रोक सकता, लेकिन यह म्‍यूनिटी बढ़ाने में कारगर साबित है।

ब्रिटेन में 1953 से 2005 के बीच व्यापक अभियान चलाकर 10 से 14 साल के सभी स्कूली बच्चों को बीसीजी का टीका लगाया गया था। हालांकि, जब देश में टीबी का संक्रमण दर कम हुआ तो अधिकतर डॉक्टरों ने इस टीकाकरण अभियान को बंद कर दिया। जिससे कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण आज ब्रिटेन में अधिकतर लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो रहे हैं।

किन देशों में लगाया जाता है बीसीजी का टीका

अफ्रीका का अधिकांश हिस्‍सा
दक्षिण अफ्रीका का काफी हिस्‍सा
रूस और पूर्व सोवियत राज्‍य
भारतीय उपमहाद्वीप
हांगकांग और ताइवान
दक्षिण-पूर्व एशिया, सिंगापुर को छोड़कर
कुछ प्रशांत क्षेत्रीय देश
बीसीजी टीका क्‍या है?

बीसीजी टीका उन बच्‍चों को दिया जाता है जिनमें टीबी होने का अधिक खतरा होता है। यह बच्‍चों को किटाणुओं से लड़ने में मदद करता है और टीबी की गंभीर बीमारी को रोकता है।

टीबी क्‍या है?

टीबी एक संक्रमित बीमारी है, जिसके चलते थकान, खांसी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ होती है।
सामान्‍य तौर पर टीबी फेफड़ों को प्रभावित करता है। ऐसा ही कुछ कोरोना भी करता है।
हालांकि टीबी लसिका, ग्रंथि, हड्डियां, जोड़ और किड़नी को भी प्रभावित करता है।
टीबी एक व्‍यक्‍ति से दूसरे व्‍यक्‍ति में खांसी, खुली जगह में थूकने या हवा में छिंकने से फैलता है।
ऐसे में यह साफ हो जाता है कि बीसीजी का टीका के कारण दुनिया के कई देश कोरोना महामारी से ज्‍यादा प्रभावित नहीं हुए हैं, क्‍योंकि कोरोना में भी कुछ उसी तरह की बीमारी इंसान को जकड़ती है, जिस तरह से टीबी में होती है।

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